शुभ दीपावली खुशियों का दीपदान महाअभियान
“जलाओ दीये पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए”
जब हम अपने घरों को दीपों और रोशनियों से सजाते हैं, तब हमारे ही आसपास ऐसे कई निर्धन और बेसहारा परिवार होते हैं जिनके घरों में एक दीया जलाने तक का तेल या बच्चों के लिए एक डिब्बा मिठाई खरीदने का सामर्थ्य नहीं होता।
इस महापर्व पर हमारा पावन संकल्प है: उन सभी जरूरतमंद परिवारों तक मिट्टी के दीये, शुद्ध सरसों का तेल, रुई की बत्ती, मिठाइयां एवं खुशियों के उपहार (Diyas & Gifts) पहुंचाना जो इसे वहन नहीं कर सकते — ताकि हर चौखट पर दीया जले और हर चेहरे पर मुस्कान खिल सके।
* सभी मिट्टी के दीये गोपालगंज एवं स्थानीय गरीब कुम्हार परिवारों से सीधे खरीद कर उनके चाक को गति और परिवारों को संबल दिया जाता है।
“दीपक केवल मिट्टी का पात्र नहीं, बल्कि आशा, करुणा और मानवता की अमर लौ है।
सच्चा उत्सव वही है जो किसी असहाय के जीवन का अंधेरा दूर कर दे।”
निर्धन व्रती परिवार (लक्ष्य)
परिवार संकल्पित / कुल दीपदाता
एकत्रित सेवा राशि
पारदर्शी प्रत्यक्ष दीपदान व उपहार सेवा
इस सेवा महाअभियान को मित्रों एवं ग्रुपों में शेयर करें
“जलाओ दीये पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए” — आपका एक शेयर किसी अंधेरे घर में रोशनी लाएगा।
₹11 से लेकर अपनी इच्छानुसार कोई भी राशि दान करें
कोई सीमा नहीं है — आपका ₹11, ₹21, ₹51 या ₹101 भी किसी गरीब परिवार के घर खुशियों का दीया रोशन करेगा।
संकल्प: दीप, शुद्ध तेल व पावन उपहार सेवा
दीप, शुद्ध तेल व पावन उपहार सेवा

danpunyasupport@ybl
दीपदान संकल्प एवं सम्मान प्रमाण पत्र
दीपदान करने के पश्चात केवल 3 विवरण भरें — प्रमाण पत्र स्वतः प्रेरणादायी शब्दों से सुसज्जित होगा
छठ पूजा 2026: सटीक पावन तिथियां एवं दिन
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी (13 नवंबर से 16 नवंबर 2026) तक संपन्न होने वाला महाअनुष्ठान
नहाय-खाय
पवित्र स्नान एवं सात्विक संकल्प
पवित्र नदियों/गंगा में स्नान कर घर-आंगन की पूर्ण शुद्धि की जाती है। इस दिन शुद्ध घी में बना कद्दू-भात (घिया-चावल) एवं चने की दाल का पावन प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
खरना (लोहंडा)
निर्जला उपवास व गुड़-खीर भोग
दिनभर का कठिन निर्जला उपवास। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़-चावल की रसियाव-खीर व रोटी बनाकर छठी मइया को भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही 36 घंटे के महाव्रत का आरंभ होता है।
संध्या अर्घ्य
अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य
बांस के सूप और दौरे में ठेकुआ, मौसमी फल, गन्ना लेकर व्रती परिवार सहित गंगा/जलाशय के तट पर पहुंचते हैं और कमर तक जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
उषा अर्घ्य व पारण
उगते सूर्य को अर्घ्य व व्रत पूर्णता
भोर में उदीयमान भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य अर्पित कर 36 घंटे के निर्जला महाव्रत का पारण किया जाता है। व्रती माताएं सुख-समृद्धि का सिंदूर आशीर्वाद देती हैं और ठेकुआ प्रसाद बांटा जाता है।
हालिया दानदाता एवं सेवा संकल्प
प्रत्यक्ष रूप से पंजीकृत वास्तविक दीपदाता सूची (डेटाबेस से लाइव)
इस पावन अभियान के पहले दीपदाता बनें!
ऊपर दिए गए QR कोड से दीपदान करें और अपना सम्मान प्रमाण पत्र पाएं।
100% पारदर्शी एवं निष्कलंक दीपदान सेवा संकल्प
हम वचनबद्ध हैं कि आपके द्वारा समर्पित संपूर्ण सेवा राशि केवल और केवल दीपावली व छठ के पावन अवसर पर निर्धन व असहाय परिवारों के घरों में मिट्टी के दीये, तेल, मिठाइयां एवं खुशियों के उपहार पहुंचाने में ही समर्पित की जाएगी।
दान एवं सेवा सहायता केंद्र
आधिकारिक UPI पता: danpunyasupport@ybl
स्थान: गोपालगंज, बिहार (Gopalganj, Bihar) - 841428
सेवा संकल्प: निर्धन परिवारों में मिट्टी के दीये, तेल एवं खुशियों के उपहार